पंचतंत्र कथा

“Panchatantra Story in Hindi” (पंचतंत्र कथा) :

दोस्तों मैं यहाँ एक कहानी सुनाऊंगा जो की पंचतंत्र से ली गई है और अंत में एक शिक्षा दी गई है।  मुझे पूरा यकीन है की ये कहानी आपको बहुत पसंद आएगी।  तो अंत तक ध्यान पूर्वक पढ़े…

कहानी का शीर्षक है ” Panchatantra Story in Hindi

 

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एक बार की बात है, एक गाँव में धनीराम नाम का एक सेठ रहता था जो उसी गाँव में धान और अनाज बेचने का व्यापार करता था। लेकिन उसकी सबसे बड़ी समस्या थी चूहे जो की धीरे धीरे भंडारगृह में रखे उसके अनाज को तबाह कर रहे थे।

एक दिन उस सेठ धनीराम की पत्नी यानी सेठानी ने एक युक्ति सुझाई की बाहर बाजार जाकर एक चूहादानी

( चूहा पकड़ने का जाल ) ले आओ। यह युक्ति सेठ को भी पसंद आई।

अगले ही दिन वो बाजार जाकर एक चूहेदानी खरीद कर ले आता है।  जब घर आकर सेठ उसे चूहेदानी को बाहर निकालता है तो बील में छिपा हुआ एक चूहा ये सब देख लेता है और डर के मारे सहम जाता है।

चूहा दौड़ा-दौड़ा जाता है और ये बात कबूतर को बताता है की घर में एक चूहेदानी लगाई है तो जरा संभल कर रहना।

जैसे ही कबूतर ये बात सुनता है तो हस-हस कर लौट-पौट हो जाता है और कबूतर उस चूहे से कहता है की ये तो तेरी समस्या है तो तू ही इससे निपट।

आप पढ़ रहे है :- Panchatantra Story in Hindi

 

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चूहा दौड़ते हुए मुर्गे के पास जाता है और सारी बात बताता है किन्तु वो मुर्गा कहता है की तू मुर्ख है क्या ? ये तेरी समस्या है तो मुझे क्यों घसीट रहा है ?

थका हारा चूहा एक बकरे के पास जाता है और सारी कहानी उस बकरे के सामने बयान कर देता है … ये सुन कर बकरा भी उस चूहे का मजाक उडाता है और कहता है की भाग यहाँ से, चूहेदानी से मुझे काहे का डर और मैं तेरी कोई मदद नहीं कर सकता।

बहुत रात हो चुकी थी और सब जगह से मायूस वह चूहा एक नए घर की तलाश करता है।

उसी रात को सेठ के घर में खटाक कर के एक आवाज आती है जो की उस चूहेदानी की होती है।  आवाज सुनने के बाद सेठानी उस चूहे दानी के पास जाकर ये परिक्षण करती है की चूहा जाल में फंसा की नहीं।

अँधेरा होने के कारण वो ठीक से देख ना पाई और उस चूहे दानी को हाथ लगाने लगी , लेकिन उस चूहे दानी में चूहा नहीं था बल्कि एक सांप फंस गया था।

जैसे ही सेठानी ने अँधेरे में उस सांप को हाथ लगाया त्यों ही उस सांप ने उसे काट लिया।

सेठानी जोर जोर से चिल्लाने लगी – ” सांप ने काटा, सांप ने काटा !! ” ये शोर सुनकर सेठजी उठ गए और जल्दी से वैद्य जी को बुला लाये।

वैद्य जी ने कहा की घबराने वाली कोई बात नहीं है , क्योकि सांप जहरीला नहीं था किन्तु सेठानी जी को कबूतर का गरमा-गरम सुप पिलाना होगा।

अब क्या था, थोड़ी ही देर में उस कबूतर को पकड़ कर और मारकर उसका सुप बनाया और सेठानी जी को खिलाया। ( ये वही कबूतर था जिसके पास चूहा सबसे पहले जाता है आगाह करने ) .

 

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सेठानी जी के साथ हुई इस घटना को सुनकर करीबी रिश्तेदार उनके घर पर मिलने आये तो उनके लिए भोजन प्रबंध किया गया और भोजन में उस मुर्गे को बनाया गया।  (ये वही मुर्गा है जिसके पास चूहा मदद मांगने गया था)

अंत में जब सेठानी पूरी तरीके से भली-चंगी हो गई तो खुश होकर सेठ ने अपने सभी सगे-सम्बन्धी को दावत पर बुलाया और दावत के भोजन में बकरे को बनाया गया। ( ये वही बकरा था जिसके पास चूहा अंत में जाता है और बकरा उसे भगा देता है )

तब तक चूहे ने अपना एक नया ठिकाना ढूंढ ही लिया था और सकुशल अपना जीवन बिता रहा था।

शिक्षा  

इस कहानी ” Panchatantra Story in Hindi ( पंचतंत्र कथा )” से हमें ये शिक्षा मिलती है की जब कभी दूसरे लोगो पर विपत्ति आती और वह व्यक्ति अगर आपसे मदद मांगने आता है तो उसकी मदद जरूर करे।  मदद केवल पैसो की ही नहीं होती वरन समस्या के समय किसी के साथ खड़े होना भी एक मदद ही है।  अगर चूहे की बात को कबूतर, मुर्गा और बकरा ध्यान पूर्वक सुनते और उसकी मदद करते तो वो भी अभी जीवित बचे होते।
और अंत मे,
औरों की मदद करते जाओ। 
एक दिन बड़े आदमी बन जाओगे।।

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Note:- I write this Story ” Panchatantra Story in Hindi ” in Hindi Language and i researched a lot to write this Story. My Motive is to just Spread Positivity and Humanity so In case if you found any Grammatical error in This article please let me know in the Comment Section.