Hindi Story With Moral (जादुई बर्तन ) :

हैल्लो दोस्तों, आज की कहानी है Hindi Story with Moral यानी एक शिक्षाप्रद हिंदी कहानी  जिसका शीर्षक है जादुई बर्तन। कहानी को अंत तक जरूर पढ़े…
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Hindi Story With Moral :-

एक बार की बात है, एक गाँव में गोवर्धन नाम का एक मजदूर रहता था जो किशनलाल नाम के एक जमींदार के यहां दैनिक भत्ते पर काम करता था।
वह जमींदार बड़ा दुष्ट इंसान था क्योकि वह दिहाड़ी मजदूरों से अपने खेत में दिन रात मजदूरी करवाता था पर भत्ते के नाम पर केवल 2 आने देता था जिससे परिवार का भरण पोषण कर पाना बड़ा मुश्किल काम होता था। ।
गोवर्धन के साथ में उसकी एक पत्नी और दो बच्चे रहते थे। वह बहुत ज्यादा गरीब था और गरीबी इतनी की दो जून की रोटी तक कमाना आसान नहीं था। 4 लोगो के छोटे से परिवार का पेट पालना बड़ा कठिन होता था।
एक दिन गोवर्धन की पत्नी इस तंगहाली भर जीवन से परेशान होकर घर छोड़कर अपनी माँ के यहाँ चली गई। अब वह मजदुर अकेले ही अपना जीवन यापन कर रहा था।
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हमेशा की तरह वह मजदुर जमींदार के खेत में काम कर रहा था। फावड़ा से जमीन की खुदाई कर रहा था की अचानक उसे कुछ आवाज आयी। गोवर्धन ने सोचा की ये कैसी आवाज है, कहीं ऐसा तो नहीं की इस जमीन के निचे कोई खजाना छिपा हो।  ये सोच कर वह जल्दी जल्दी से जमीन की खुदाई करने लगा।
बहुत मेहनत करते करते शाम हो गई और इतनी मेहनत के बाद एक बड़ा सा बर्तन निकला तो गोवर्धन ने अपने सर पर हाथ मारते हुए कहा की
” है भगवान् ! हाय रे मेरी फूटी किस्मत ! मैंने इतनी मेहनत की और इसका फल क्या मिला… ये बड़ा सा बर्तन  “
गोवर्धन बहुत थक चूका था तो उसने फावड़े को उस बड़े से बर्तन में डालकर वंही छाँव में सो गया। जब नींद खुल तो फावड़ा लेने के लिए उस बर्तन के पास पंहुचा तो क्या देखता है… उस बर्तन में तो 100 फावड़े रखे हुए है।
गोवर्धन को अपनी आँखों पर विश्वास नहीं हुआ। उसने सारे फावड़े बाहर निकालकर फिर से एक फावड़ा उस बड़े से बर्तन में डाल दिया। देखते ही देखते फिर से उस फावड़े के 100 फावड़े हो गए।
अब तक गोवर्धन समझ चूका था की ये कोई साधारण सा बर्तन नहीं है , ये एक चमत्कारी बर्तन है जिसमे कोई भी वस्तु डालो तो थोड़ी देर में उस वस्तु को 100 गुना कर देता है। फिर क्या था , गोवर्धन ने समय पाकर उस बर्तन को अपने घर ले गया और सवेरे उठ कर सारे फावड़े बाजार में बेच आया… जिससे उसे बहुत सारी कमाई हुई।
अब गोवर्धन रात्रि में एक फावड़ा उस बर्तन में डालता और सवेरे 100  फावड़े लेकर बाजार में बेच आता … ऐसा करते करते उसकी माली हालात में सुधार आया और अब तो वह अपनी पत्नी और बच्चो को भी घर ले आया था।
एक दिन किशनलाल जमींदार को इस बात की भनक पड़ी और उसने गोवर्धन के घर में घुस कर वह बर्तन ले लिया, यह कहकर की इस बर्तन पर मेरा हक़ है क्योकि यह मेरी जमीन से निकला है।
बर्तन को घर लाकर उस जमींदार ने सबसे पहले अपनी पत्नी के सोने चांदी के गहनों को उस बर्तन में डाला और देखते देखते उन गहनों का सौ गुना हो गया। लेकिन वह जमींदार लालची हो गया था और उसने ओर सोने चांदी के गहनों को सौ गुना किया।
एक दिन जमींदार सोचने लगा की आखिर इस बर्तन के अंदर ऐसा क्या है जो ये हर वस्तु को सौ गुना कर देता है।अंदर जाकर देखना चाहिए … यह सोचकर वह जमींदार उस बर्तन के अंदर कूद गया। वह बहुत बारीकी से उस बर्तन का परिक्षण कर रहा था की अचानक उस जमींदार के हूबहू हमशक्ल 100 और जमींदार आ गए।
फिर क्या था सभी अपने आप को जमींदार बता रहे थे और कह रहे थे की ये घर-बार, जमीन-जायदात, सोने-चांदी  सभी मेरा है।  ये कहते कहते सभी लड़ने लगे और एक दूसरे को ख़तम कर दिया।

«कहानी की शिक्षा»

इस कहानी Hindi Story with Moral से हमें ये प्रेरणा मिलती है की हमें कभी भी ज्यादा का लालच नहीं करना चाहिए। जितना मिलता है उसमे ही संतोष करना चाहिए। क्योकि कभी कभी ये ज्यादा का लालच बड़ी विकट परिस्थिति में डाल सकता हैं।
मुझे आशा है की आप सभी को ये शिक्षाप्रद कहानी बड़ी पसंद आयी होगी। अगर अच्छी लगी है तो अपनी प्रतिक्रिया निचे Comment Box में जरूर बताइये।
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Note:-    I wrote this story “Hindi Story With Moral” in Hindi Language and I tried my Best to frame this story in my own words but in case if you will find any Grammatical Mistake in this article please Let me know in the Comment Box so than i can correct this.  Thankyou.