Dadi Ki Rasoi  – दादी की रसोई 

नमस्कार दोस्तों !

आज हम बात करेंगे दादी की रसोई  (Dadi Ki  Rasoi ) की जिसके फाउंडर है – “अनूप खन्ना” , ये एक सामाजिक कार्य है जिसमे गरीब लोगो को उच्च गुणवत्ता का खाना खिलाना है, जो की एक बहुत अच्छी शुरुआत है।

एक अध्ययन में ये बात सामने आई है की भारत देश में प्रतिदिन लगभग 20 करोड़ लोग भूखे ही सोते है और हम लोग आज भी भोजन को व्यर्थ फेकने में थोड़ी सी देर नहीं करते है ,तो किसी भूके को खाना खिलाने से नेक काम कुछ ओर हो ही नहीं सकता है। अनूप जी के द्वारा किया गया ये कार्य दादी की रसोई  Dadi Ki Rasoi सराहनीय है ।

 

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  • Dadi Ki Rasoi में क्या खाना दिया जाता है

दादी की रसोई में में हम 5 रूपये में उच्च गुणवत्ता का खाना उपलब्ध करवाते है जिसमे हर दिन खिचड़ी बनाई जाती है और अलग अलग दाल उपयोग की जाती है जैसे चना दाल , अरहर दाल आदि  जिसमे हरी ताज़ी सब्जिया भी डाली जाती है। अब तो साथ में एक मिठाई और एक मौसमी फल भी दिया जाता है।

 

Dadi Ki Rasoi

Dadi Ki Rasoi by Anoop Khanna

 

  • Dadi Ki Rasoi में खाने की गुणवत्ता

खाने की क्वालिटी का पूछने पर अनूप खन्ना कहते है की खाने में गुणवत्ता को बरकरार रखता हूँ।  खाना बनाने में साफ सुथरा पानी का उपयोग करता हूँ ( RO Water) , देसी घी का चौखा लगाता हूँ , मसाले खुद के बनाता हूँ  खिचड़ी बनाने में प्रयुक्त होने वाले चावल में India Gate Basamati Rice का उपयोग करता हूँ।

सवेरे 6-7 बजे जब मैं और मेरी पत्नी घूमने जाते है तो लौटते वक्त हरी सब्जिया खरीद लेते है , और आस पड़ोस के सब्जी वाले भी हमें बाजार भाव से सस्ते दाम में सब्जिया देते है, वे कहते है की इस नेक काम में हम भी कुछ मदद कर दे।  बाजार में जिस भाव से हरी सब्जिया बिकती है उससे कम कीमत में हमें हरी पत्तेदार सब्जिया मिल जाती है।  चावल फैक्ट्री रेट पर मिल जाते है जो की 50 रुपये किलो अच्छे बासमती चावल होते है ।

आज हमारे साथ कई सारे वालंटियर्स काम करते है।

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  • Dadi Ki Rasoi की शुरुआत कैसे हुई

जब अनूप जी से पूछा गया की Dadi Ki Rasoi की शुरुआत कैसे हुई तो पिछले दिनों को याद करते हुए कहते है की

 मेरे पिताजी एक Freedom Fighter थे जिन्होंने देश को आजादी दिलाने में बड़े महापुरुषों के साथ एक महती भूमिका निभाई है, तो स्वाभाविक सी बात है की सेवा भावना मेरे अंदर शुरू से थी। मैंने कई बार अपने आस पास और दूरस्थ इलाके में सेवा का कार्य किया है।  आज मैं 60 बरस से ज्यादा का हो गया हूँ लेकिन ये समाज सेवा का कार्य बड़ी तन्मयता से करता हूँ। 

एक बार की बात है जब मैं अपनी माँ और बच्चो के साथ खाना खा रहा था तो बच्चे कहने लगे की दादी ठीक से खाना नहीं खा रही है , इस पर मेरी माँ कहती है की मेरे हिस्से का जो भी बचता है वो गरीबो को दे देना।  ये बात सुनकर हम सभी हसने लगे क्योकि दादी कहती ही कितना है। 

लेकिन उस दिन हमने सोचा की गरीबो के लिए कुछ तो करना ही चाहिए तो तय हुआ की हम गरीबो के लिए केवल 5 रूपये में उच्च गुणवत्ता का खाना उपलब्ध करवाएंगे और नाम रखा Dadi Ki Rasoi दादी की रसोई  

 इस तरीके से इस नेक काम की शुरुआत हुई।

हसी के लहजे में अनूप जी कहते है मेरी माँ गब्बर सिंह की तरह कहती है की कितने आदमी थे यानि कितने लोगो ने आज खाना खाया और हम कहते है की 400 – 500 लोग।  आज मेरी माँ ठीक से चल फिर नहीं पाती है लेकिन 21 अगस्त को जैसे तैसे हम अपनी माँ को यहाँ लाते है।    

 

Dadi Ki Rasoi by Anoop Khanna Image Credit:-  Dadi Ki Rasoi Facebook Page 

 

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  • Dadi Ki Rasoi कब से कर रहे है

इस पर अनूप जी कहते है की मैं ये काम पिछले 3 साल से कर रहा हूँ।  21 अगस्त से इस काम की शुरुआत हुई थी।  आज अनूप जी आयु 60 बरस से ज्यादा हो गई है किन्तु सामाजिक सेवा का काम आज भी बड़े चाव से करते है। अनूप खन्ना जी का कहना है की मैं सभी युवाओ को कहता हूँ की किसी भी काम को करने के लिए वक्त और जरुरत को ना देखा जाय , जैसा भी हो बस शुरुआत कर दो।  मैंने भी सिर्फ 2 स्टाल से ये काम शुरू किया था , ये काम कुछ लोगो के साथ ही शुरू किया था लेकिन आज एक नहीं बल्कि 2 जगह पर में Dadi Ki Rasoi लगता हूँ:

एक लगाता हूँ नॉएडा सेक्टर 17 में सुबह 10 से 11 बजे, और 

दूसरी बार लगता हूँ नॉएडा सेक्टर 29 में 12 से 2 बजे तक।

आज करीब 500 लोग खाना खाने आते है जिसमे कई तबके के लोग होते है जैसे गरीब , असहाय , विद्यार्थी , हाथ रिक्शा खींचने वाले , सफाई कर्मचारी , मजदूर , सभी लोग हो सकता है किसी कंपनी का कर्मचारी भी Dadi Ki Rasoi में खाना खाने आया हो और उसके पीछे उसी कंपनी का मालिक भी खड़ा हो।

मैं यहाँ किसी को भीख नहीं देता होता हूँ , सभी लोग आते है और बड़े स्वाभिमान से 5 रुपये निकालकर खाना खाते है लेकिन जो असहाय और असमर्थ होते है मैं उनसे कोई पैसे नहीं लेता हूँ।

कई बार लोग हमारे इस नेक काम में डोनेट भी करते है लेकिन हम कभी भी उनसे पैसे नहीं लेते है। मैं कहता हूँ की आप समय निकालकर खुद यहाँ आये और अपने पुरे परिवार को भी साथ में लाये और लोगो को खाना अपने हाथ से बाटिये।

इसके अलावा मैं यहाँ लोगो को तहज़ीब भी सिखाता हूँ की जो कोई हेलमेट लगाकर नहीं आएगा या फिर जो अपने वाहन को सही से पार्किंग नहीं करेगा उसको खाना नहीं मिलेगा।

बहुत सारे लोग अपनी खुशिया बांटने के लिए भी हमसे मिलते है जैसे किसी का जन्मदिन है या किसी की शादी की सालगिरह हुई या किसी के घर में किसी प्रिय जान की पुण्य तिथि हुई तो वे खुद आते है और अपने पैसो से खाना बनवाकर लोगो को खिलाते है।

Dadi Ki Rasoi

Dadi Ki Rasoi by Anoop Khanna Image Credit :- Dadi Ki Rasoi Facebook Page

अब में उन गरीब लोगो को कपडे भी देता हूँ जो की सिर्फ 10 रुपये प्रति जोड़ी होता हैं। यानी में उन्हें  कोई भीख नहीं देता हूँ , वे लोग आते है और 10 रूपये निकालकर बड़े स्वाभिमान से अपनी पसंद का कपडा खरीदते है।  कपडे पुराने जरूर होते है लेकिन उन्हें अच्छे से धो कर ड्राई क्लीनिंग करके अच्छे से पैक कर देते है। कई बार कपडे बिलकुल नए और First Hand होते है।  

वो कहते है न की 

Beggers have no choice

मतलब की अगर आपके घर से कोई पुराना कपडा निकलता है तो आप उन्हें किसी गरीब को दे देते है और वह आदमी आपसे बिना कोई सवाल पूछे वो कपडा रख लेता है  लेकिन मैं यहाँ उन्हें चॉइस प्रोवाइड करता हूँ। यानी वे अपनी पसंद का कपडा खरीदते है वो भी सिर्फ 10 रुपये में। 

इसके अलावा मैं एक ओर सामाजिक कार्य करता हूँ और वो है जेनेरिक दवाइया जो की प्रधानमंत्री जन औषधि योजना के अंतर्गत आती है। जिसमे बाहर दूसरे मेडिकल स्टोर पर मिलने वाली महँगी दवाइया बहुत ही सस्ते दाम पर दी जाती है।  बाहर मिलने वाली 20 – 30 रुपये की एक टेबलेट यहाँ सिर्फ 1 या 2 रुपये में मिल जाती है।




  • Dadi Ki Rasoi Address:-

Shop no 39
Block I, Ganga Shopping Complex, Sector 29
Noida, Uttar Pradesh 201301
India
Mobile No:- 098995 37711

Facebook Page:-  https://www.facebook.com/dadikirasoibyanoopkhanna

Dadi Ki Rasoi Website :- Dadi Ki Rasoi

 

आगे अनूप जी दूसरे लोगो को सन्देश देते हुए कहते है की हम लोगो को एक Satisfaction Limit यानि संतुष्टि की एक सीमा निर्धारित करनी होगी यानी महीने का कितना कमाना चाहते है और कब तक।  जब यह पूरा हो जाता है तब हमारा भी कुछ कर्तव्य बनता है की हम इस समाज को कुछ लौटाए। बस मैं भी कुछ यही कर रहा हूँ Dadi Ki Rasoi के जरिये

क्योकि जब जरुरत से ज्यादा कमाई हो जाती है तो वो या तो सरकार के पास जाता है या चोर-गुंडे लोगो के पास जाता है तो बढ़िया होगा की हम आगे से अपनी मर्जी से इस समाज को कुछ लौटाए।

बस यही थी Dadi Ki  Rasoi की कहानी…

दोस्तों मुझे आशा है की आपको ये कहानी बहुत पसंद आयी होगी।  अगर अनूप खन्ना जी ये सेवा का कार्य पसंद आया हो तो इसे फेसबुक और व्हाट्सप्प पर शेयर जरूर करे।

आपका बहुमूल्य समय देने के लिए धन्यवाद।

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Note:-    I wrote this story “Dadi Ki Rasoi” in Hindi Language and I tried my Best to frame this story in my own words but in case if you will find any Grammatical Mistake in this article please Let me know in the Comment Box so than i can correct this.  Thankyou.