{HINDI} 5 Best Motivational Story in Hindi for Students:

नमस्कार दोस्तों ,

आज में लेकर आया हूँ 5 सबसे बेहतरीन “Motivational Stories in Hindi For Students वो भी हिंदी में (HINDI) जो आपको बहुत ज्यादा पसंद आएगी तो शुरू से लेकर अंत तक ध्यान से पढ़े इस आर्टिकल को

तो चलिए बिना समय गवाए शुरू करते है।

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  • Motivational Stories in Hindi for Students

(संगत का असर ) एक बार की बात है एक बड़ा ही खुशहाल राज्य था जहाँ का राजा बड़ा दयालु था। वह राजा अपनी प्रजा से बहुत प्रेम करता था लेकिन उससे भी ज्यादा प्रेम वह अपने प्रिय खरगोश से करता था क्योकि यह खरगोश उसको उसकी पत्नी ने भेंट स्वरुप दिया था।
खरगोश की सेवा में नित नौकर चाकर लगे रहते थे , उसके खाने पिने का बड़ा ध्यान रखा जाता था।  उसके लिए तरह-तरह के फल-फूल, स्वादिष्ट बेर , और ताज़ी हरी घांस भोजन में दी जाती थी।
खरगोश की इस ठाट-बांट को उसी राज्य के 2 शरारती चूहे देख लेते है और मन ही मन प्रसन्न हो जाते है।  मौका पाकर वे चूहे राज महल में घूंस जाते है और खरगोश से प्रार्थना करने लगते है की
” हे मित्र ! हम दोनों को इस राज महल के फल और फूल खाने दो , वैसे तो हमने कई वस्तुओ का स्वाद चखा है किन्तु राजमहल का स्वादिष्ट भोजन कभी नहीं चखा , कृपा करके हम गरीबो को एक बार व्यंजन का आनंद ले लेने दीजिये। “
खरगोश उन दोनों चूहे की विनती को सुनकर मान गया और कहने लगा की ” ठीक है तुम दोनों यहाँ केवल एक दिन ही ठहर सकते हो और व्यंजन का आनंद ले सकते हो लेकिन खबरदार इसके लिए तुम दोनों को छुपना पड़ेगा क्योकि यहाँ के राजा को गन्दगी से सख्त नफ़रत है , समझ गए “
कुछ ही समय पश्चात सेवक फल – फूल की टोकरी ले आये और खरगोश के सामने रख कर चले गए , जैसे ही सेवक बहार गए वे दोनों चूहे उस फूलो की टोकरी पर टूट पड़े और अपने स्वाभाव के अनुकूल सब कुछ तहस नहस कर दिया।
जब राजा ने देखा की चारो तरफ गन्दगी फैली पड़ी है तो उनका मुँह गुस्से से लाल हो गया , चूहो ने जैसे ही  परिस्थिति को समझा वैसे ही दोनों भाग कर एक छोटे से बिल में घूंस गए। अब खरगोश के आलावा वहां कोई मौजूद नहीं था तो राजा ने सोचा की ये गन्दगी किसी ओर ने नहीं बल्कि इस खरगोश ने फैलाई है।
तब राजा ने उस खरगोश को बाहर निष्कासित कर दिया।
Moral Of the Story : अपनी संगत को ध्यान पूर्वक चुने क्योकि कहा गया है की एक व्यक्ति का भविष्य इस बात पर निर्भर करता है की वह किन किन लोगो के साथ अपना सबसे ज्यादा समय व्यतीत करता है

  • Motivational Stories In Hindi for Students 2

(सुनो सबकी करो मन की)
दो मेंढक एक दूसरे के घनिष्ठ मित्र थे।  दोनों दोस्त एक साथ कही पर जा रहे थे की अचानक बिच रास्ते में एक बड़ा सा गड्डा आ जाता है और दोनों मेंढक उस गड्डे में घिर जाते है।
दोनों मेंढक बाहर निकलने की पुरजोर कोशिश कर रहे थे किन्तु बाहर निकलने में सफल नहीं हो रहे थे क्योकि गड्डा काफी गहरा था।  बाहर निकलने की कोशिश में दोनों मेंढक लहू लुहान हो गए।
Motivational Stories in Hindi

Motivational Stories in Hindi

बाहर खड़े सभी मेंढक ये सब कुछ देख रहे थे और जोर जोर से चिल्लाते हुए कह रहे थे की “तुम दोनों बाहर निकलने की कोशिश छोड़ दो क्योकि ये असंभव सा प्रतीत होता है।”
यह सुनकर एक मेंढक हार मान लेता है। वही दूसरा मेंढक बाहर निकलने की अपनी कोशिश में लगा हुआ था।
बार बार असफल होने के बावजूद वह कोशिश करता रहा और अंततः गड्डे से बाहर आने में  सफल हो गया और जो पहला मेंढक था उसका दम घुटने के कारण गड्डे में ही उसकी मौत हो गई।
बाहर निकलने के बाद जब सभी मेंढक ने उससे पूछा की “हम तो बार बार चिल्ला रहे थे की कोशिश मत करो बाहर निकलने की फिर भी तुम कोशिश करते रहे ऐसा क्यों ?”

मेंढक ने स्थिति को समझने के बाद जवाब दिया की  “मैं बहरा है, मुझे कुछ भी सुनाई नहीं देता है। जब तुम लोग बोल रहे थे की बाहर आने की कोशिश ना करो तब मुझे लगा की तुम लोग मुझे चिल्ला चिल्ला के बाहर आने के लिए  प्रेरित कर रहे हो ”

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Moral Of the Story : कुछ तो लोग कहेंगे और लोगो का काम है कहना तो इस कहानी से हमें ये प्रेरणा मिलती है की सुनो सबकी और करो मन की।

  • Motivational Stories in Hindi for Students 3 

(राजा और पत्थर )

एक राज्य का राजा बहुत परेशान था और उसकी परेशानी का कारण था उसकी प्रजा का दिन ब दिन आलसी होते जाना।  राजा को कुछ भी समझ नहीं आ रहा था की आखिर करू तो क्या करू, फिर अचानक उसे एक युक्ति सूझी ।

सवेरे का समय था , बाजार चालू हो गया था , राहगीर खरीदी करने के लिए आने जाने लगे थे।  राजा ने समय पाकर एक व्यस्ततम सड़क के बीचो बिच एक बड़ा सा पत्थर रख दिया और खुद एक पेड़ के पीछे जाकर देखने लगा।

सभी लोग आ रहे थे और निकल रहे थे। कुछ लोग उस पत्थर को उलाँघ कर निकल जाते तो कुछ लोग उसकी साइड से निकल जाते , कुछ लोग राजा को दोषी ठहराते की राजा को सूझ पड़ती या नहीं, देखो सड़क कितनी जर्जर हो गई है, ये कहके वे लोग भी आगे निकल जाते। 

लेकिन कुछ समय पश्चात् एक गरीब किसान वहा से गुजर रहा था तो उसने देखा की एक बड़ा पत्थर बिच रास्ते में पड़ा हुआ है , चलो इसे हटा देता हूँ।  किसान ने अपने सिर पर रखी हुई लकड़ी के बंडल को निचे उतारते हुए उस बड़े पत्थर को हटाने की नाकाम कोशिश करने लगा , बहुत कोशिश के बाद भी वह पत्थर नहीं हिला। 

वह किसान कोशिश करता रहा और अंत में उस पत्थर को सड़क के पार रखकर जैसे ही अपने लकड़ी के बंडल को उठाने के लिए झुका तो उसे एक पोटली मिली जो उस पत्थर के निचे रखी थी।  

जब किसान ने उस पोटली को खोला तो उसके होश उड़ गए क्योकि उसमे सोने की असरफियाँ राखी हुई थी और उसमे एक पर्ची पड़ी हुई  जिसमे लिखा था की जो कोई इस पत्थर को बिच रास्ते से हटा देगा वो ही इन सोने की असरफियाँ का सच्चा हक़दार होगा।

 

Moral Of the Story : जो व्यक्ति हमेशा स्वार्थी होता है और जिसे अपने अलावा किसी ओर की बिलकुल भी नहीं पड़ी होती है उसका जीवन अंत में दयनीय हो जाता है।  कोई फरक नहीं पड़ता की आपके पास कितनी बड़ी कार है या कितना बड़ा घर है क्योकि अंत में तो वही 2 गज की जमीन ही काम आएगी।
 

और दरगाह पर लिखा हुआ भी क्या खूब है:

ओरों का भला करते जाओ ,

बड़े आदमी बन जाओगे 


  • Motivational Stories in Hindi for Students

(आलस और परिश्रम )

एक बार एक संत अपने शिष्य के साथ भारत भ्रमण पर निकले थे। चलते चलते वे दोनों एक गांव पहुंचे जहाँ पर पहुंचते बहुत शाम हो गई थी।  शिष्य ने अपने संत से कहा की हे गुरूवर ! क्यों ना हम आज रात्रि इसी गांव में विश्राम करले और गुरु ने अपने शिष्य की बात को ठीक समझा।

Motivational Stories in Hindi for Students

Motivational Stories in Hindi

वे दोनों एक भले व्यक्ति के घर पहुंचे और बताया की हम दोनों गुरु-शिष्य भारत भ्रमण पर निकले है  रात्रि विश्राम के लिए आपके घर रुकना चाहते है।  तब उस भले मानुष ने उन दोनों को रुकने की इजाजत दी।

ध्यान से देखने पर संत ने पाया की उस व्यक्ति के पास बहुत बड़ी और चौड़ी कृषि उपयोगी जमीन खली पड़ी थी , उसके बाद भी वह व्यक्ति दिन हिन् जैसी जिंदगी जी रहा था।

जब संत ने पूछा की, “हे भले मानुष ! तुम्हारे पास इतनी सारी जमीन खाली पड़ी हुई है तो तुम इसमें खेती क्यों नहीं करते।”

पूछने पर उस व्यक्ति ने कहा की “हमारे पास एक पालतू भैंस है जिसका दूध निकालकर हम बाजार में बेचते है और जो आमदनी होती है उससे हमारे घर का खर्च निकल जाता है तो हमें और मेहनत करने की क्या जरुरत है।”

रात में जब सब सो गए थे तो गुरु ने अपने शिष्य को उठाते हुए कहा की चलो चलते है और साथ में इसकी भैंस को भी ले चलते है।  जब शिष्य ने ये सुना तो वो शिष्य अपने गुरु से पूछने लगा की गुरूजी आपने हमेशा से सिखाया है की चोरी महापाप है तो आप भैंस को साथ में ले जाने के लिए क्यों कह रहे है।  तब गुरु ने कहा की जितना कहता हूँ उतना ही करो।

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अब शिष्य तो शिष्य है और अपने गुरु की आज्ञा की अवहेलना भी नहीं कर सकता। वे दोनों गुरु शिष्य अपने साथ भैंस लेकर चले गए।

5 साल बाद शिष्य को अपनी गलती का पश्चाताप होता है , वह उस भले मानुष से मिलने उसके गांव पहुंच जाता है ताकि वह अपनी भूल का प्रायश्चित कर सके। 

जब शिष्य उसके घर पहुँचता है तो देखता है की 5 पहले जो झोपड़ी नुमा घर था उसकी जगह एक विशालकाय घर बना हुआ था , हारो तरफ फसल लहलहा रही थी। शिष्य ने सोचा की वह भला मानुष शायद घर छोड़कर चला गया है और उसकी जगह ये कोई नगर सेठ रहने आ गया है।

लेकिन जांच पड़ताल करने पर पता चला की ये तो वही भला मनुष्य है जिसने हमें 5 साल पहले रात रुकने के लिए जगह दी थी। 

शिष्य ने पूछा की हे मनुष्य तुम्हारी हालत इतनी अच्छी कैसे हो गई तब वह मनुष्य कहता है की जिस रात आप दोनों मेरे घर पर रुके थे उसी रात कोई अनजान व्यक्ति मेरी भैंस चुरा कर भाग गया , सवेरे जब हमें पता चला तो हम सभी लोग घबरा गए क्योकि वो भैंस हमारी रोजी रोटी थी।  तब मुझे आपके गुरु की बात याद आई और मैं खेती करने में जुट गया , दिन रात मेहनत करने के बाद आज मेरे पास सब कुछ है जैसे जमीन-जायदात , खेती-बाड़ी , घर-बार और भी बहुत कुछ।

एक समय था जब मैं एक भैंस चोरी हो जाने पर रो रहा था लेकिन आज मेरे पास कई सारी गाय-भेंसे है। तब उस शिष्य को समझ आया की क्यों गुरूजी ने भैंस को साथ में ले जाने को कहा था।

 

Moral Of the Story:

इस कहानी से हमें ये प्रेरणा मिलती है की मेहनत और लगन से किया गया कार्य हमेशा फलदायी होता है।

कहते है की

“आलसी व्यक्ति को उतना ही मिलता है जितना मेहनत करने वाले छोड़ देते है “


  • Motivational Stories in Hindi for Students 5 

(अपनी सोयी शक्ति पहचाने )

एक मादा मुर्गी अपने 5 अंडो की देखभाल कर रही थी और दाना-पानी (भोजन) के लिए बाहर गई थी की अचानक एक बाज का अंडा कंही से आकर मादा मुर्गी के (घोंसले) घर में आकर गिर जाता है।  जब मादा मुर्गी देखती है की मेरे घोसले में 5 अंडे कैसे आये। मुर्गी ने सोचा की की शायद मेरा ही होगा (लेकिन था वो बाज का अंडा )

सब कुछ ठीक चल रहा था , अंडो से छोटे छोटे चूजे निकले , बच्चे धीरे-धीरे बढ़ने लगे और चलना सीखने लगे। वह बाज का बच्चा, मुर्गे के बच्चे के साथ खेलने लगा , वह उन सभी को अपना भाई मानने लगा।
एक दिन अचानक उस बाज के बच्चे ने ऊंचाई पर देखा की एक बड़ा सा पक्षी ऊंचाई पर उड़ रहा था तो उसने अपनी माँ से पूछा की ” माँ ! ये कौन सा पक्षी है जो इतनी ऊंचाई पर उड़ रहा है ? मैं भी बड़ा होकर इतनी ऊंचाई तक उड़ना चाहता हूँ।”
तब मादा मुर्गी ने कहा की  ” बच्चे ! वो पक्षी बाज़ है जो की ऊंचाई पर उड़ने के लिए जाना जाता है और रही बात तुम्हारे उड़ने की तो तुम इतनी ऊंचाई तक नहीं उड़ सकते क्योकि मुर्गे के बच्चे थोड़ा-बहुत ही उड़ पाते है।”
यह सब सुनने के बाद बाज के बच्चे ने भी मान लिया की मैं इतना ऊँचा नहीं उड़ सकता हूँ और उसने अपना पूरा जीवन इसी विश्वास के साथ बिता दिया  इतनी ऊंचाई पर , इतनी देर तक नहीं उड़ सकता (जबकि वह जाना जाता है अपनी उड़ान के लिए )।

Moral Of the Story : इस कहानी से हमें ये शिक्षा मिलती है की अपने आप को कभी भी कम नहीं आंकना चाहिए क्योकि बहुत सारे लोग अपने भाग्य और किस्मत का रोना रोकर मेहनत करने से कतरा जाते है और अंततः उनका पूरा जीवन साधारण और औसत सा बीताने लगते है।

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