{HINDI} IDGAH STORY | MUNSHI PREMCHAND | STORY IN HINDI

IDGAH STORY | MUNSHI PREMCHAND | STORY IN HINDI ईदगाह



नमस्कार दोस्तों, 

आज मैं लेकर आया हूँ MUNSHI PRECHAND की एक कहानी IDGAH STORY (ईदगाह) जो की HINDI में होगी (STORY IN HINDI) जो की आप सभी ने शायद पढ़ी भी होगी लेकिन ईद और रमज़ान Eid के इस पावन त्यौहार पर इस कहानी को ना याद किया जाय, ऐसा हो नहीं सकता।


MUNSHI PRECHAND, STORY IN HINDI, IDGAH STORY
{HINDI} IDGAH STORY | MUNSHI PREMCHAND | STORY IN HINDI
मुंशी प्रेमचंद हिंदी साहित्य के मशहूर कहानिकार है।  इनकी कई सारी कृतियाँ आज भी लोग उत्साह के साथ पढ़ते है जैसे नमक का दरोगा , मंदिर और मस्जिद , बड़े घर की बेटी और भी बहुत सारी कहानिया है जो एक वास्तविकता को दर्शाती है।  उन्ही में से एक कहानी है ईदगाह जिसमे माँ समान दादी और पोते की एक अनूठी कहानी है। मुझे आशा ही नहीं वरन पूर्ण विश्वास है की आप सभी को ये कहानी पढ़ कर बहुत प्रसन्नता होगी।  तो चलिए दोस्तों शुरू करते है बिना समय गवाए ... 

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IDGAH STORY (STORY IN HINDI) :-

रमज़ान Ramadan का पाक महीना चल रहा था। सभी लोगो ने कठिन माने जाने वाले रोजे रखे थे जिसमे खाना तो क्या पानी भी नहीं पी सकते थे और अब तो सभी लोग ईद की तैयारी में जुटे थे।

बढ़ो के साथ साथ बच्चे भी बहुत उत्साहित थे क्योकि ईद पर पास के शहर में ईदगाह पर एक मेला लगता था जहाँ सारे बच्चे नए नए कपडे और टोपी पहन कर मेला देखने जाते थे। 

वही हामिद नाम का 7 साल का एक छोटा बच्चा भी बहुत उत्साहित था मेले में जाने के लिए। हामिद के दोस्त महमूद और मोसिन भी तैयार थे मेला देखने के लिए।  महमूद के पास 12 पैसे थे और मौसीन के पास 8 पैसे थे जो मेले में खर्च करने हेतु पर्याप्त थे।

घर में हामिद के अलावा उसकी एक बूढी दादी (अमीना दादी) थी। घर की हालत काफी ख़राब थी। दादी से केवल 3 पैसे लेने के बाद (जो की बहुत कम थे) हामिद अपने दोस्तों के साथ मेला देखने गया। 

रास्ते में सभी बच्चे बहुत सारी बाते कर रहे थे की मैं तो ये खरीदूंगा, मैं तो वो खरीदूंगा , मैं तो उस बड़े झूले में झूलूँगा ... बाते करते करते वे पास के शहर में स्थित ईदगाह पहुंच जाते है।

सभी बड़े लोग अपनी नमाज पूरी करने के बाद एक दूसरे को गले लगाकर ईद की बधाई दे रहे थे। 
सभी बच्चे मेले में पहुंच जाते है , मेले में तरह तरह के झूले , हिंडोले , चखरी , मिठाई और नमकीन की दुकाने आदि कई तरह की दुकाने थी।

महमूद और मोसिन एक झूले में झूलने गए जो की एक एक पैसे में झूला रहा था। हामिद ने सोचा की इस बेकार सी चकरी में झूल कर चक्कर खाने से अच्छा है की ये एक पैसा में अच्छी जगह खर्च करू। 

झूला झूलने के बाद बच्चे एक मिठाई की दूकान पर पहुंचे और वहां स्वादिष्ट मिठाई जैसे मीठी जलेबी खाने लगे....  मन तो हामिद का भी बहुत था मिठाई खाने का लेकिन अगर ये 3 पैसे मिठाई में खर्च कर दिए तो आगे खिलोने कैसे ले पाऊंगा ये सोच कर वो आगे बढ़ गया। 



मिठाई खाने के बाद सभी बच्चे शरबत की छोटी सी दूकान पर चले जाते है और शरबत पिने लगते थे , यहाँ भी हामिद ने शरबत पर अपने 3 पैसे खर्च नहीं किये। उसे बुरा भी लगा क्योकि किसी भी दोस्त ने शरबत पिलाने के लिए उससे नहीं पूछा।

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शरबत पिने के बाद वे सभी आगे बड़े , आगे एक लौहार की दूकान आती है जहाँ कोई भी लुभावनी वस्तु नहीं पड़ी थी तो सभी बच्चे आगे एक खिलोने की दुकान की तरफ बड़ गए लेकिन उस लौहार की दूकान से गुजरते वक्त हामिद को एक चिमटा दिखा , उसने याद किया की दादी जब भी तवे पर रोटी बनाती है तो उसके हाथ जल जाते है तो क्यों न मैं ये चिमटा खरीद लू , 

यह सोच कर के हामिद ने उस लौहार से पूछा की ये चिमटा कैसे दिया है, 

लौहार ने देखा की ये तो एक छोटा बच्चा है और इसके साथ कोई बड़ा व्यक्ति (अम्मी या अब्बू ) भी नहीं है तो उस लौहार ने कहा की बेटा ये तुम्हारे काम की चीज नहीं है। 

हामिद ने फिर से पूछा की ये चिमटा बेचने के लिए नहीं है क्या ? 

तब दुकानदार ने कहा की हां बेचने के लिए ही है,,,

तो हामिद ने कहा की तो फिर आप कीमत बताओ ना। 

तब दुकानदार ने कहा की इस चिमटे के 6 पैसे लगा दूंगा।  

यह सुनकर हामिद का दिल बैठ गया और सोचने लगा की इतना महंगा, हामिद ने कहा की सही पैसे लगालो,

तब दूकानदार ने कहा की ठीक है 5 पैसे लगा दूंगा इस चिमटे का, लेना है तो लो।  

हामिद ने कहा की 3 पैसे में देते हो तो दो,

तब दूकानदार ने कहा की चलो ठीक है ले लो 3 पैसे में                 

वंही आगे महमूद ने एक सिपाही खिलौना लिया और मौसीन ने वकील खिलौना लिया।  जब हामिद अपना चिमटा ले के अपने दोस्तों के पास पंहुचा तो उसके सारे दोस्त जोर-जोर से हसने लगे की ये क्या ले आये हो, तुम्हे ओर कोई खिलौना नहीं मिला क्या ?

तब हामिद ने कहा की ये एक खिलौना ही तो है , अगर मैं इसे अपने कंधे पर रख लू तो बन्दुक बन जाएगी और इसे बजाता हूँ तो ये एक संगीत वाद्य यंत्र भी बन जाएगा, तुम्हारे ये खिलौने तो मिटटी से बने है जो एक बार घिर जाने पर ही टूट जायेंगे। 

सभी दोस्त यह सुनकर सोचने लगे और हामिद से अपने चिमटे के बदले खिलौना बदलने का कहने लगे। 

शाम होते होते सभी बच्चे अपने घर पहुंचे और जाते ही अपने खिलोनो से खेलने लगे लेकिन कुछ ही देर में किसी खिलोने की गर्दन टूट गई तो किसी की टांग। 

जब हामिद अपने घर पंहुचा और आवाज़ लगाने लगा दादी...  दादी ... , आवाज़ सुनकर दादी दौड़ती हुई आयी और अपने बच्चे को गले लगाकर प्यार करने लगी। फिर दादी ने पूछा की बेटा हामिद मेले से क्या लाये हो तब हामिद ने अपना हाथ आगे करते हुए बताया की में चिमटा लाया हूँ दादी। 

दादी ये देखकर परेशान हो गई की ये क्या लाया है, ये कोई लाने की चीज़ है, पैसे बर्बाद कर दिये।  इन पैसो की  कुछ मिठाई खाता या कोई खिलौना लाता।  

तब हामिद ने कहा की दादी ! मैंने कई बार देखा है की आप जब रोटी बनाती हो तो आपके हाथ और अंगुली आग और गरम तवे से जल जाती थी तो मुझे अच्छा नहीं लगता था और वैसे भी अगर मैं खिलौना लाता तो वो एक या दो दिन में ही टूट जाता और ये चिमटा तो लोहे का बना हे ना तो ये कभी नहीं टूटेगा और अब आपकी अंगुली भी नहीं जलेगी। 

ये सुनकर दादी भाव विभोर हो गई क्योकि वो जानती थी की हामिद के पास बहुत कम पैसे थे , हामिद के दोस्तों ने मिठाई खाई होगी, नमकीन खाई होगी, झूले भी झूले होंगे और अपनी पसंद के खिलोने भी लिए होंगे, इसका भी बहुत मन हुआ होगा मिठाई खाने का पर इसने वो सब नहीं किया और वहा मेले में मेरे बारे में सोचा, मेरी चिंता की ...  दादी की आँखों से अब आंसू बहने लगे थे, दादी ने अपने मन में कहा "या अल्लाह ! मेरे बच्चे को बरकत दे " 

बस यही थी कहानी हामिद और अमीना दादी की जिसे हम सब ईदगाह के नाम से जानते है जो मुंशी प्रेमचंद कृत है। "



IDGAH STORY | MUNSHI PREMCHAND | STORY IN HINDI        

दोस्तों मुझे आशा है की आप सभी को ये आर्टिकल " {HINDIIDGAH STORY | MUNSHI PREMCHAND | STORY IN HINDI" बहुत पसंद आया होगा।

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NOTE:- This Story is in Hindi Language and I researched a lot and tried my Best to write this Article but in case if you found any grammatical mistakes in this Article, you can Comment down below. Please Cooperate with us, Keep Supporting and Keep Reading  

  

   

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