चंदा कोचर की जीवनी हिंदी में (एक मैनेजमेंट ट्रेनी से लेकर आईसीआईसीआई बैंक के उच्चतम पद तक पहुंचने की कहानी):

हेल्लो दोस्तों आज में लेकर आया हूँ एक महिला प्रधान कहानी। जहाँ भारत में महिला को अबला की दृष्टि से देखा जाता है , किसी भी कार्य क्षेत्र में पुरुषो को महिलाओ की अपेक्षा अधिक महत्व दिया जाता है,
ऐसी विपरीत परिस्थिति में देश की सबसे सर्वश्रेष्ठ प्राइवेट बैंक आईसीआईसीआई बैंक के उच्चतम शिखर पर पहुंचना एक अविश्वसनीय कार्य सा प्रतीत होता है।
भारतीय उद्योग जगत और बैंकिंग क्षेत्र में जाना माना नाम चंदा कोचर  (Chanda Kochhar)  को तो आप सभी जानते होंगे।
तो चलिए शुरू से जानते है उनके जीवन के बारे में , ऐसी कोनसी बाते है जिनकी वजह से उनको ये सफलता मिली।
मेरा आपसे निवेदन है की आप सभी ये पोस्ट अंत तक और ध्यान पूर्वक पढ़े।

Chanda Kochhar Biography in Hindi :-

चंदा कोचर का जन्म 17 नवम्बर 1961 को राजस्थान के जोधपुर जिले में एक मध्यम वर्गीय परिवार में हुआ था तथा उनका पालन पोषण जयपुर में हुआ।
इनका बचपन का नाम चंदा रूपचंद आडवाणी था , जो बाद में शादी के पश्चात चंदा दीपक कोचर हो गया। इनके पिता का नाम रूपचंद आडवाणी था।
बचपन से ही शिक्षा में अव्वल चंदा कोचर का सपना सिविल सर्विसेज में जाकर देश सेवा करना था। किन्तु धीरे धीरे उनका इंटरेस्ट फाइनेंस फील्ड की ओर बढ़ने लगा।
चंदा कोचर ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा राजस्थान के जयपुर में “सेंट एंजेला सोफिया स्कूल ” में पूरी की।
वे 13 साल की रही होगी जब उनके पिता का स्वर्गवास हो गया था। नियति की इस मार से उन्हें काफी ठेस पहुंची।
जैसा मेने आपको पहले बताया था की चंदा कोचर CHANDA KOCHHAR शुरू से शिक्षा में गहरी रूचि रखती थी।
अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूर्ण करने के पश्चात चंदा कोचर मुंबई चली गई और मुंबई के “जय हिन्द कॉलेज ” से सन 1982 में बैचलर ऑफ़ आर्ट्स में अपनी ग्रेजुएशन की डिग्री कम्पलीट की।
फाइनेंस क्षेत्र में बढ़ते अपनी रूचि के कारण बाद में मुंबई के ही “जमनालाल बजाज इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट स्टडीज ” से मास्टर डिग्री और ICWAI  में कास्ट एकाउंटेंसी का अध्ययन किया।
मैनेजमेंट की शिक्षा में अपने सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के कारण उन्हें Wockhardt Gold Medal और कास्ट एकाउंटेंसी में सबसे अधिक अंक अर्जित करने के कारण जे. एन. बोस स्वर्ण पदक से नवाजा गया।
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CHANDA KOCHAR Love Life :-

मुंबई के जमनालाल बजाज इंस्टिट्यूट ऑफ़ बिज़नेस स्टडीज में प्रवेश लेने पश्चात चंदा कोचर की मुलाक़ात दीपक कोचर से हुई। कॉलेज के ही दिनों में दोनों की दोस्ती काफी गहरी हो गई ।

जैसे ही मैनेजमेंट (MBA) में मास्टर की डिग्री कम्पलीट हुई दीपक ने चंदा को प्रपोज़ किया किन्तु चंदा ने ये प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया।

किन्तु कुछ वर्षो के बाद जब दीपक ने चंदा के सामने सीधे शादी का प्रस्ताव रखा तो इस प्रस्ताव को चंदा कोचर अस्वीकार नहीं कर पाई। और अंततः दोनों विवाह बंधन में बांध गए। दीपक कोचर विंड एनर्जी (पवन ऊर्जा ) की एक कंपनी के मालिक है।
इनके दो बच्चे भी है , लड़के का नाम है अर्जुन जो स्पोर्ट्स में काफी गहरी रूचि रखता है और कई सारे स्पोर्ट्स इवेंट में पार्टिसिपेट भी करता है।
इनकी लड़की का नाम है आरती जिसने अमेरिका से अपनी इंजीनियरिंग की डिग्री पूरी की और अभी रिलायंस इंडस्ट्री में काम करती है।
आरती की शादी (या सगाई ) आदित्य काजी से हुई है जिनका परिवार मुकेश अम्बानी के करीबी है और स्वयं आदित्य मुकेश अम्बानी के चेयरमैन स्टाफ के मुख्य अफसर है।
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चंदा कोचर की उपलब्धिया :- 

  • चंदा कोचर ने 1984 को (जब उनका मास्टर कम्पलीट हुआ) आईसीआईसीआई बैंक को बतौर मैनेजमेंट ट्रेनी के रूप में ज्वाइन किया।  और ये उनकी मेहनत और लगन का ही परिणाम था जो 25 साल बाद उसी बैंक आईसीआईसीआई की चीफ एक्सेक्यूटिव अफसर (मुख्य कार्यकारी अफसर ) और मैनेजिंग डायरेक्टर (प्रबंधक निर्देशक ) बनी।
  • आईसीआईसीआई बैंक को एक बड़े रिटेल फाइनांसर के रूप में स्थापित करने का कीर्तिमान इन्ही को जाता है। आईसीआईसीआई बैंक देश की सर्वश्रेष्ठ बैंक SBI (स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया ) के बाद की दूसरी बड़ी बैंक है तथा प्राइवेट जगत की सबसे बड़ी बैंक है।
  • ये चंदा कोचर की मेहनत और लगन का ही परिणाम था जो ICICI BANK देश की सर्वश्रेष्ठ प्राइवेट बैंक में शुमार है।
  • चंदा कोचर को 2014 में फार्च्यून मैगज़ीन ने एशिया की सबसे प्रसिद्ध महिलाओ की सूची में दूसरा स्थान मिला था।
  • बैंकिंग के क्षेत्र में अपने अच्छे प्रदर्शन के कारण चंदा कोचर को वाशिंगटन में “वुडरो विल्सन ” पुरस्कार से भी नवाज़ा गया। वुडरो विल्सन पुरस्कार ICICI समूह द्वारा स्थानीय समुदाय में लोगो के जीवन को सुधारने और बड़े पैमाने पर दुनियाभर में सुधार के लिए दिया जाता है।
  • 2011 में ग्लोबल लीडरशिप अवार्ड से भी सम्मानित किया गया।
  • भारत सरकार ने चंदा कोचर को देश के तीसरे सबसे बड़े पुरस्कार पद्म विभूषण से भी सम्मानित किया।

एक महिला होकर पुरुष प्रधान बैंकिंग क्षेत्र में नए नए कीर्तिमान रचकर महिलाओ के लिए एक नई उमंग जगाई है तथा ओर महिलाओ के लिए प्रेरणा का कार्य किया है।

आज भी कई जगह देखने को मिल जाता है जहाँ महिलाओ के साथ केवल शोषण ही होता है , एक पुरुष को प्राथमिकता दी जाती है। ऐसे में चंदा कोचर ने अपनी उपलब्धियों और शिक्षा के बल पर अन्य महिलाओ को भी आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया है।

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Note:- This Article is in Hindi Language. I tried my best and researched a lot to write this Article but in case if you found any mistake or grammatical error then please cooperate with us .
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