ध्यान की शक्ति:

नमस्कार दोस्तो, आज मैं ले कर आया हूँ एक प्रेरणा दायी  (Motivational) कहानी जिसका शीर्षक है “ध्यान की शक्ति” . ये कहानी काफी रौचक है जिसे ध्यान पूर्वक और अंत तक पढ़े  तो चलिए दोस्तों शुरू करते है कहानी।

एक बार की बात है , एक फ़क़ीर था जो एक वृक्ष के निचे नित ध्यान में लगा रहता था।  उसी रास्ते से एक लक्कड़हारा हर रोज लकडिया काटने जंगल की ओर जाता था। फ़क़ीर उसको हर दिन लकडिया काटते और ले जाते हुए देखता था।

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एक दिन फ़क़ीर ने उस लक्कड़हारे को रोकते हुए पूछा की तुम हर रोज जंगल जाते हो और लकडिया काटते  हो इसके बाद भी 2 वक्त के भोजन का प्रबंध कर पाना काफी मुश्किल होता है।
तुम उस जंगल के आगे क्यों नहीं जाते , वंहा आगे एक चन्दन का वृक्ष है  जहाँ एक दिन जाओगे तो पुरे हफ्ते भर के भोजन की व्यवस्था हो जाएगी।
यह सुन कर लक्कड़हारा कुछ सोचने लगा की मेरी पूरी जवानी इस जंगल में लकडिया काटते हुए बीती है तो मुझसे अच्छा इस जंगल को ओर कोन जानता होगा और ये फ़क़ीर तो इस वृक्ष के निचे बैठा रहता है इसे क्या मालुम की जंगल के आगे क्या है,
शायद ये फ़क़ीर मुझे मुर्ख बना रहा है लेकिन फिर भी मन में शंका है , क्यों ना आगे चलकर देखा जाए।
जब वह जंगल के आगे गया तो क्या देखता है … आगे तो सचमुच में एक चन्दन का वृक्ष था।
वह लक्कड़ हारा दौड़ते हुए उस फ़क़ीर के पास आया और फ़क़ीर के कदमो में गिरकर जोर जोर से रोने लगा की मैं तो नासमझ था मुझमे बुद्धि नहीं थी और मैंने आपकी बुद्धि पर भी शक किआ , मुझे माफ़ करे …
अब क्या था , वह लक्कड़हारा एक दिन जंगल जाता और 8 -10 दिन घर पर आराम करता।
एक दिन फिर से फ़क़ीर से मुलाक़ात होती है तब फ़क़ीर उस लक्कड़हारे से कहता है की
“तू कितना मुर्ख है , तू तो चन्दन के जंगल पर ही अटक गया , क्या तूने कभी ये नहीं सोचा की चन्दन के वृक्ष के आगे भी कुछ हो सकता है , अरे जड़बुद्धि जा आगे जा , आगे चांदी की एक खदान है।”

अब तो लक्कड़हारे को विश्वास भी होने लगा था, वह तेज भागते हुए गया और फिर से वह क्या देखता है।

आगे तो सचमुच में चांदी की खदान थी। वह बहुत खुश हुआ। फिर क्या था , वह एक दिन चांदी की खदान में जाता और महीने 6 महीने घर पर आराम करता।

यह सिलसिला चलता रहा।  आगे वह चांदी की खदान से सोने की खदान तक और सोने की  खदान से हिरे की खदान तक जा पंहुचा। जिससे लक्कड़हारा बहुत ही ज्यादा प्रसन्न हुआ।

एक दिन फिर से वह फ़क़ीर उस लक्कड़हारा  से मिलता है तब फ़क़ीर कहता है की तू कितना नासमझ है , अब तो तू हीरे की खदान पर ही रुक गया , अरे आगे क्यों नहीं जाता मुर्ख।




लेकिन अब तो लक्कड़हारा अकड़ने लगा था क्योकि उसके पास सोने ,चांदी , बेशकीमती हीरे-जहरात और बढे बढे महल थे तो फिर वह क्यों उस फ़क़ीर की सुने।

लेकिन फिर भी वह लक्कड़हारा उस फ़क़ीर से पूछता है की – अरे उस हीरे की खदान से आगे अब क्या हो सकता है।

तब वह फ़क़ीर कहता है की क्या कभी तूने सोचा है की मुझे सब कुछ पता है की कहा चन्दन का जंगल है और कहा चांदी सोने और हीरे की खदान है तो फिर मेने वंहा जाकर ये सारी चीजे क्यों नहीं उठायी ,

मेरे पास ऐसा क्या है की ये सारी बेशकीमती वस्तुए मुझे फीकी लगाती है।

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तब उस लक्कड़हारे ने अचंभित होकर पूछा की आपके पास ऐसी कोन सी वस्तु है जिससे ये सारी महंगी वस्तुए भी आपको कम लगती है  ??

तब फ़क़ीर ने कहा की मेरे पास वह अनमोल चीज है जिसकी कीमत कोई नहीं लगा सकता और उस चीज का नाम है –

ध्यान

जी हाँ मेरे पास ध्यान की शक्ति (POWER OF MEDITATION) है जिसे बड़े बड़े धनवान पाने की ख्वाहिश रखते है पर पा नहीं सकते।

तो तुम भी ध्यान करो ताकि संसार की कोई भी समस्या तुम्हे समस्या न लगे।

तो दोस्तों आज के इस आधुनिक जीवन में भी हम लोगो को काफी परेशानियों का सामना करना पडता है , बहुत सारा पैसा होने के बावजूद मानसिक शांति की कमी बनी रहती है। मन बड़ा व्यथित रहता है। तनाव तो हर तीसरे व्यक्ति की समस्या है.

अगर आप इस सभी समस्या से निजाटी पाना चाहते है तो अभी से मैडिटेशन करना प्रारम्भ कर दीजिए , शुरुआत में समस्या होगी किन्तु बाद में आदत हो जाएगी , और जीवन में इसका काफी सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।

तो जल्दी से शुरू करे ध्यान (MEDITATION)

तो दोस्तों कैसी लगी ये कहानी , निचे कमेंट करके जरूर बताये , मैं आपके कमेंट जरूर पढूंगा और अगर आप चाहते है की हमारी कोई भी कहानी या आर्टिकल मिस ना करे तो जल्दी से और अभी से  हमें फॉलो करे और ये बिलकुल फ्री है दोस्तों।

मिलते है फिर एक नई पोस्ट में तब तक के लिए अपना और अपने परिवार का ध्यान रखे।

जय हिन्द जय भारत।

धन्यवाद।


Note:- This Article is in HINDI Language. I tried my best and I researched a lot to write this article. If you find any Grammatical Mistake then please Keep Calm and Keep Support.

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