विद्यार्थी प्रतियोगी परीक्षा:
ये आर्टिकल Competitive Exam (प्रतियोगी परीक्षा) की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों के लिए है। हर साल की तरह इस साल भी लाखो की तादात में विद्यार्थी सरकारी नौकरी (Govt. Job) की तैयारी करेंगे लेकिन सफलता केवल उन्ही लोगो को मिलेगी जो अपनी पढाई को लेकर बहुत ही गंभीर है, जिनके अंदर धैर्य (Patience ) और दृढ़ता (Determination ) है।प्रत्येक वर्ष सरकारी नौकरी के कई सारे नोटिफिकेशन आते रहते है , वेकन्सी 1000 रहती है जबकि 1,00,000+ की संख्या में लोग फॉर्म भर देते है तो सफलता का अनुपात केवल 0.01 रहता है।इस साल भी RAILWAY के GROUP D  की वेकन्सी निकली है जिनमे लाखो की संख्या में फॉर्म भरे जाएंगे लेकिन सफलता केवल गिनती भर लोगो को मिलेगी।

और कई बार तो ऐसा भी होता है की छात्र सालो से मेहनत कर रहा है उसके बाद भी सफल नहीं होता है कारण कुछ भी हो सकता है लेकिन आगे सफल होने के लिए प्रेरणा (MOTIVATION FOR STUDY)  की जरुरत होती है।
तो चलिए मैं एक वास्तविक जीवन की एक कहानी (Real Life Story) बताता हु जो आप सभी लोगो को निश्चय ही प्रेरणा (Motivation) से भर देगी। तो चलिए शुरू करते है…
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“यहाँ में बात करूँगा एक ऐसी लड़की की जिसने कई सारी मुसीबतो और समस्याओ को पीछे छोड़कर एक ऐसा मुकाम हांसिल किया है जो सच में कबीले तारीफ है.
एक ऐसी उपलब्धि जिसे पाने का सपना तो हर कोई देखता है लेकिन संभव कर पाना बहुत मुश्किल सा लगता है।
नाम है सुरभि गौतम जिन्होंने सिविल सेवा परीक्षा 2016 में 50वी रैंक हांसिल की.
चलिए शुरू से जानते है इनकी लाइफ के बारे में,
सुरभि गौतम का जन्म मध्य प्रदेश के एक बहुत ही छोटे से गांव में हुआ , एक ऐसा गांव जहाँ बेटी का जन्म होना कोई ख़ुशी की बात न होती थी।
सुरभि बताती है की उनके जन्म के वक्त केवल 2 ही लोग खुश थे और वो थे उनके माता पिता।
स्कूली पढाई उन्होंने अपने गांव के ही एक हिंदी माध्यम के एक स्कूल से की जहाँ पर बेसिक सुविधाएं भी मिल पाना कठिन होता था , कभी शिक्षक न मिल पाते तो कभी किताबे न मिल पाती थी।
सुरभि एक ऐसे स्कूल में पढ़ी जहाँ की कोई स्कूल यूनिफार्म नहीं थी , कक्षा में बैठने के लिए टेबल और कुर्सी तक नहीं थी।
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गांव इतना छोटा की ट्यूशन और कोचिंग क्लास का तो किसी ने नाम भी ना सुना था। तो सुरभि ने स्वाध्याय (SELF STUDY) कर के अपनी पढाई पूरी की। गांव में पर्याप्त बिजली की भी व्यवस्था नहीं थी इसलिए कई बार सुरभि केरोसिन लैंप में अपनी पढाई करती थी।
5वी कक्षा में सुरभि को गणित में 100 में से 100 अंक मिलते है जो उनके स्कूल के इतिहास में ऐसा पहली बार ऐसा हुआ था। और इससे सुरभि काफी प्रसन्न हुई। तब सुरभि को लगा की पढाई लिखाई ही उन्हें आगे ले जा सकती है। इस तरह सुरभि अपनी पढाई में लग गई।
10 वी कक्षा में उन्हें 93.4 % अंक आये और जिले की प्रावीण्य सूचि (District Merit List) में उनका नाम भी आया। तब सुरभि को उसी गांव के लोग एक सेलिब्रिटी की तरह दर्जा दे रहे थे। तब कही सुरभि के जहन में ये बात थी की उन्हें DM यानि कलेक्टर बनना है।
12 वी में भी सुरभि मेरिट लिस्ट में आती है। फिजिक्स ,केमिस्ट्री और मैथ्स में अच्छे अंक के कारण उन्हें एपीजे अब्दुल कलम स्कालरशिप मिलती है।
इसके बाद सुरभि स्टेट इंजीनियरिंग एग्जाम देती है और अच्छे रैंक के कारण भोपाल के एक Govt. Engineering College में आगे की पढाई पूरी करती है।
जहाँ पर सुरभि बताती है की उन्हें अपनी ख़राब इंग्लिश स्पोकन के कारण काफी समस्या का सामना करना पढ़ा। कॉलेज का पहला ही दिन बहुत बुरा जाता है क्योकि कॉलेज में ज्यादातर स्टूडेंट्स  इंग्लिश माध्यम स्कूल से पढ़कर आये थेऔर सुरभि गांव के हिंदी माध्यम स्कूल से पढ़ी थी।
इंग्लिश के एक सिंगल सेंटेंस को भी बनाना सुरभि के लिए मुश्किल होता था इस बात का उन्हें बहुत बुरा लगता था। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और यह दृढ़ निश्चय किया की पहले सेमेस्टर के अंत तक वह अपनी कमजोर  इंग्लिश को सुधार लेगी और फर्राटेदार इंग्लिश बोलूंगी।
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इंग्लिश के कई सारे शब्दों को कागज पर लिख कर अपने रूम की दीवार पर चिपका देती थी और हर रोज उन शब्दों को पढ़ती और revision भी करती थी |
उन इंग्लिश शब्दों हो हर रोज यूज़ करती और इंग्लिश में ही सेल्फ टॉक यानि खुद से बाते करती थी।
ये सुरभि की मेहनत का ही परिणाम था की फर्स्ट सेमेस्टर में वे यूनिवर्सिटी टॉप करती है और उन्हें चांसलर अवार्ड मिलता है।




सुरभि ने अपनी कॉलेज पढाई के दौरान अपनी लाइफ को काफी स्ट्रिक्ट रखा।  वह कभी मूवी देखने नहीं जाती थी और दोस्तों के साथ पिकनिक मानाने भी नहीं जाती थी। क्योकि फाइनेंसियल कंडीशन इतनी अच्छी नहीं थी।

सुरभि इस बात को अच्छे से जानती थी की अगर कुछ बनना है तो इन सभी में समय न बर्बाद करू और ज्यादा से ज्यादा समय अपनी पढाई में ही खर्च करू।

यही नहीं इसके अलावा उन्हें फिजिकल प्रॉब्लम भी थी जिसमे हड्डियां कमजोर हो जाती है और हर 15 दिन में पेनिसिलिन का एक हाई डोज़  इंजेक्शन लेना पढता था।

इतनी परेशानियों के बावजूत सुरभि ने अपनी पढाई जारी रखी।

कॉलेज पूरा होते ही TCS में Placement हुआ लेकिन सुरभि ने ज्वाइन नहीं किया। इसके बाद काफी सारे टेक्निकल और नॉन टेक्निकल एग्जाम लिखे और सभी में वे सफल भी रही जैसे –
GATE, SAIL, ISRO, MPPSC PRE, SSC CGL, DELHI POLICE, FCI, IB और BARC .
फिर सुरभि ने 1 साल के लिए मुंबई में नुक्लेअर साइंटिस्ट की पोस्ट को ज्वाइन किया जो काफी कठिन मानी जाती है।
फिर इंडियन इंजीनियरिंग सर्विसेज यानि IES का एग्जाम दिया और आल इंडिया रैंक 1 हांसिल किया जिससे Indian Railways ज्वाइन किया।
लेकिन कलेक्टर बनाने की इक्छा अभी तक उनके मन में ही थी। फिर उन्होंने सिविल सर्विस की एग्जाम देना तय किया।
काफी व्यस्त होने के बाद भी और ट्रेनिंग में एक स्थान से दूसरे स्थान जाना होता था इसलिए बहुत सारी  किताबे साथ लेकर चलना मुश्किल होता था इसलिए  उन्होंने e-notes बनाने शुरू किये।
सुरभि अपने नोट्स को अपने मोबाइल में या फिर अपने पैड में रखती थी और जब कभी टाइम मिलता पढ़ने लगती थी।
कई बार उनका भी मन होता था की सिविल सेवा की तैयारी छोड़ दे , सुरभि भी कई बार परेशान हुई पर उन्होंने हार नहीं मानी और अंततः सिविल सेवा की परीक्षा में उनका चयन हुआ जिमे उनकी आल इंडिया रैंक 50 आयी।
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तो सुरभि गौतम  एक ऐसा उदहारण है जो कई सारी मुसीबतो और परेशानियों  के बावजूत हार नहीं मानती है और अपनी मेहनत के बल पर सब कुछ हांसिल करती है।
छोटे गांव के एक Hindi Medium स्कूल से पढ़ने और इंडिया की सबसे कठीन परीक्षा में पहले बार में ही चयन होना सुरभि की मेहनत का ही परिणाम है।
सुरभि गौतम कहती है की आज के समय में बच्चे ट्यूशन क्लास के पीछे लगे रहते है लेकिन सेल्फ स्टडी ही बेस्ट स्टडी है। तो आप सभी जो अभी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे है वे सभी अपने आप पर भरोसा रखे।
और अंत में –

There Is No Shortcut To Success and There Is No Substitute For Hard Work.

दोस्तों ये आर्टिकल “Motivation For COMPETITIVE EXAM” केसा लगा ?

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जय हिन्द जय भारत
धन्यवाद।।


NOTE:- This Article is in Hindi language . and I tried my best for writing this Article, If you find any Grammatical Error in this Article, Please Keep Calm and Keep Support.