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MAHABHARAT | MAHABHARAT IN HINDI | KARNA ARJUN

KARNA AUR ARJUN | MAHABHARAT | MAHABHARAT IN HINDI

जानिए कैसे महाभारत युद्ध (Mahabharat Yudh) में वासुदेव श्री कृष्ण ने अपने परम भक्त अर्जुन के घमंड को तोडा 



नमस्कार दोस्तों ,
आज की इस पौराणिक कथा 
"MAHABHARAT | MAHABHARAT IN HINDI | KARNA AUR ARJUN " 
में मैं आपको महाभारत युद्ध के एक किस्से का वर्णन करूँगा की कैसे भगवान श्री कृष्णा ने अर्जुन के घमंड को तोडा। 
आप सभी से मेरा निवेदन है की इस कहानी को ध्यान पूर्वक और अंत तक पढ़े, और अगर पसंद आये तो अपने दोस्तों के साथ इसे अवश्य शेयर करे। 

MAHABHARAT IN HINDI | KARAN ARJUN YUDDH | MAHABHARAT YUDDH
MAHABHARAT IN HINDI

"MAHABHARAT | MAHABHARAT IN HINDI | KARNA   AUR ARJUN"
" युद्ध का शंखनाद बज चूका था, महाभारत का युद्ध चल रहा था।  पांच पांडवो के सामने सौ की संख्या में कौरव मौजूद थे। 

जब बात चुनने की आयी थी तब कौरवो ने भगवान कृष्णा की सेना को चुना और  पांच पांडवो ने भगवान कृष्णा का साथ माँगा।  

अर्जुन के रथ को स्वयं परमावतार श्री कृष्ण सारथी बनकर चला रहे थे।  अर्जुन ने प्रभु कृष्णा को कहा की अपना रथ कर्ण की तरफ मोड़ ले। ( कर्ण जो की माता कुंती की पहली और विवाह पहले की संतान थी , इस तरीके से कर्ण अर्जुन का ही भाई था  ) 
  
अर्जुन और कर्ण आमने सामने थे।  युद्ध चल रहा था , अर्जुन अपने तीर और बाणो से कर्ण की तरफ हमला कर रहे थे और उधर कर्ण भी अपने पुरे सामर्थ्य से अर्जुन का सामना कर रहे थे। 


कर्ण इस बात को भली भाती जानते थे की विजय तो सिर्फ पांडवो की ही होगी क्योकि पांडवो की तरफ धर्म की रक्षा के लिए प्रभु कृष्णा थे और कौरव अधर्म के मार्ग पर थे फिर भी कर्ण ने अपने मित्र और कौरवो के सबसे बड़े भाई दुर्योधन  का साथ देकर मित्रता की एक मिशाल कायम की। 

बहुत ही भयावह युद्ध चल रहा था , चारो तरफ बाणो की बौछार हो रही थी।  कंही सैनिक मर रहे थे।  कभी हाथियों की चिंघाड़ तो कभी घोड़ो की हिनहिनाहट। 

कभी पांडव खुश होते तो कभी कौरव। 

जब अर्जुन और कर्ण आमने सामने थे तो एक दूसरे पर तीर बाणो से वार कर रहे थे। 

अर्जुन ने अपना तीर निकाला और धनुष में तानते हुए कर्ण के रथ की तरफ साध दिया, जब तीर कर्ण के रथ पर लगा तो रथ 10 - 12 हाथ की दुरी पर पीछे खिसक गया। 

इसका जवाब देते हुए कर्ण ने भी अपना तीर निकाला और अपने धनुष में तानते हुए अर्जुन के रथ की ओर वार किया, जब कर्ण का तीर अर्जुन के रथ पर लगा तो रथ केवल 2 या 3 हाथ की दुरी पर ही पीछे खिसक पाया , यह देख भगवान् श्री कृष्णा ने कर्ण की तारीफ़ करते हुए कहा   

"वाह... कर्ण,  वाह,


तुम्हारा जवाब नहीं  "

यह सुन अर्जुन अचरज में पड़ गए, और सोचने लगे की जब मैंने तीर छोड़ा तो कर्ण का रथ 10 - 12 हाथ की दुरी पर पीछे की ओर खिसका और कर्ण के तीर के वार से मेरा रथ केवल 2 या 3 हाथ की दुरी पर ही पीछे की ओर खिसका तो इससे यह सिद्ध होता है की मैं ज्यादा बलवान हूँ फिर वासुदेव कर्ण की तारीफ़ क्यों कर रहे है, मेरी क्यों नहीं।

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अर्जुन ने फिर प्रयास किया और इस बार तो अर्जुन के तीर से कर्ण का रथ 15 हाथ की दुरी पर पीछे खिसका , इसका प्रत्युत्तर देते हुए कर्ण ने भी वार किया पर फिर भी अर्जुन का रथ केवल 5 हाथ पीछे खिसका।  यह देखते हुए श्री कृष्णा ने फिर से कर्ण की तारीफ़ की  

" वाह... कर्ण , वाह "

यह सुनकर अर्जुन से रहा नहीं गया और वे भगवान् श्री कृष्ण से पूछ ही बैठे की 

"हे केशव ! 
ये क्या है , जब मैं तीर चलता हूँ तो मेरे वार से रथ 10 - 15 हाथ की दुरी पर पीछे खिसकता है और कर्ण के तीर के वार  रथ केवल 3 या 5 हाथ की दुरी पर पीछे जाता है तो बलवान तो मैं हुआ ना ...  फिर आप कर्ण की तारीफ़ क्यों कर रहे हो 

इसका जवाब देते हुए  प्रभु कृष्ण कहते है

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" हे पार्थ ! 

तुमने सत्य कहा किन्तु तुमने मेरी बात पर ठीक से गौर नहीं किया। जरा ध्यान पूर्वक देखो की हमारे रथ के पहियों पर क्या लगा हुआ है , स्वयं शेष नाग।  

हे पार्थ , जरा ध्यान से देखो की हमारे रथ की पताका (झंडा) पर कौन है , स्वयं मेरा (श्री राम) परम भक्त और महावीर श्री हनुमान। 

और ये बताओ पार्थ की तुम्हारे रथ का वाहक यानी सारथी कौन है , स्वयं मैं (श्री कृष्णा ) जो इस धरती और धरती पर पलने वाले जीवन का रचयिता है, तो तुम्हारा रथ ब्रम्हांड की परम शक्तियों से रक्षित है। 

ऐसे में कर्ण के वार से अगर तुम्हारा रथ 1 हाथ की दुरी से भी पीछे हट जाता तो मैं कर्ण की ही तारीफ़ करता और रही बात तुम्हारे तीर के वार की तो कर्ण का रथ बहुत ही साधारण है जिसे 10 - 15 हाथ की दुरी पर पीछे धकेलना उतनी बड़ी बात नहीं है 

इस बात से यह साफ़ स्पष्ट हो जाता है पार्थ की कर्ण तुमसे बहुत ज्यादा बलवान है  "

इस घटना से अर्जुन सोच में पड़ जाते है और इस तरीके से भगवान् श्री कृष्णा अर्जुन के घमंड को तोड़ते है। 

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दोस्तों मुझे आशा है की आपको ये कहानी "MAHABHARAT | MAHABHARAT IN HINDI | KARNA AUR ARJUN " बहुत पसंद आयी होगी




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NOTE :- This Story is in Hindi Language and I researched a lot and tried my Best to write this Article but in case if you found any grammatical mistakes in this Article , you can Comment down below. Please Cooperate with us, Keep Supporting and Keep Reading.
  

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